हिलेरी क्लिंटन की भारत यात्रा

अमरीका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन भारत के पांच दिवसीय दौरे पर हैं.
भारत यात्रा पर आईं अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने शनिवार को कहा है कि अमरीका भारत पर पाकिस्तान से बातचीत शुरू करने को लेकर किसी तरह का दबाव नहीं डालेगा.
उन्होंने कहा कि भारत की स्थिति से अमरीका अवगत है. भारत को अमरीका एक संप्रभु देश के रूप में जानता है जो अपने संबंधों को लेकर खुद फैसले ले सकता है.
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से बातचीत करना या न करना दोनों देशों का आपसी मामला है और इस यात्रा का उनका मकसद भारत-अमरीका संबंधों को बल देने पर है.
पाँच दिन की यात्रा पर आई अमरीकी विदेशमंत्री ने मुंबई में कहा कि भारत और अमरीका दोनों ही आतंकवाद से प्रभावित हैं और दोनों को ही मिलजुलकर काम करना चाहिए.
ताज होटल में दिए अपने भाषण में हिलेरी क्लिंटन ने कहा कि हम दुख दर्द में आपके साथ हैं. अमरीकी विदेश मंत्री ने कहा कि भारत के साथ एक नए दौर की शुरूआत हो रही है.
पाकिस्तान भी गंभीर
उनका कहना था कि पाकिस्तान ने भी पिछले दिनों में आतंकवाद के ख़िलाफ़ कड़े क़दम उठाए हैं.
इसके पहले उन्होंने ताज होटल में रतन टाटा, मुकेश अंबानी, स्वाति पीरामल, जमशेद गोदरेज और चंदा कोचर समेत भारत के प्रमुख उद्योगपतियों से मुलाक़ात की और कारोबार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की.
हिलेरी क्लिंटन ने ताज होटल में 26 नवंबर के हमले में मारे गए लोगों श्रद्धांजलि अर्पित की.
चरमपंथी हमले के पीड़ित लोगों के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए वो इस होटल में ही रुकीं.
उल्लेखनीय है कि ताज होटल को 26 नवंबर, 2008 को चरमपंथियों ने निशाना बनाया था. उस हमले में 170 लोग मारे गए थे जिसमें कई विदेशी शामिल थे.
इस हमले के बाद से भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में खटास बनी हुई है.
अहम दौरा
हिलेरी क्लिंटन रविवार को दिल्ली जाएंगी जहाँ वो भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और विदेश मंत्री एसएम कृष्णा से मुलाक़ात करेंगी.
भारत और अमरीका दोनों ही आतंकवाद से प्रभावित हैं और दोनों को मिलजुलकर काम करना चाहिए
हिलेरी क्लिंटन
माना जा रहा है कि अपनी पांच दिवसीय यात्रा में हिलेरी भारत के साथ अमरीका के राजनीतिक और आर्थिक संबंधों को मज़बूत करने की कोशिश करेंगी.
प्रेक्षकों का कहना है कि अपनी यात्रा के दौरान हिलेरी भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्तों को बेहतर बनाने के लिए दबाव भी डालेंगी.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ओबामा प्रशासन भारत सरकार की इन चिंताओं पर विराम लगाना चाहता है कि पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान के कारण भारतीय हितों की अनदेखी हो रही है.
भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव भी अमरीका के लिए चिंता का विषय है और पिछले साल से अमरीका लगातार भारत और पाकिस्तान पर बातचीत शुरु करने के लिए दबाव बनाता रहा है.
हाल ही में दोनों देशों ने गुट निरपेक्ष वार्ताओं के दौरान एक संयुक्त बयान जारी किया जिसकी दोनों ही देशों में अलग अलग तरीके से व्याख्या हो रही है.
भारत में कुछ विशेषज्ञ ये भी मान रहे हैं कि अमरीका के दबाव में ही भारत को यह संयुक्त बयान जारी करना पड़ा है.
बयान में भारत इस बात पर भी राज़ी हुआ है कि समग्र वार्ता को आतंकवादी घटनाओं से न जोड़ा जाए.















