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राहुल जी ने आज देश के लाखों छात्रों और उनके परिवारों की उस पीड़ा को शब्द दिए हैं, जिसे यह व्यवस्था लगातार अनदेखा करती रही है।
जब एक मध्यमवर्गीय परिवार अपनी पूरी बचत, अपनी मेहनत की कमाई और कई बार कर्ज़ तक सिर्फ़ एक परीक्षा की तैयारी में झोंक देता है, तब यह सिर्फ़ शिक्षा का सवाल
भारत की शिक्षा व्यवस्था आज सिर्फ़ एक वसूली तंत्र बन गई है।
ज़रा सोचिए - देशभर के परिवार जितना पैसा सिर्फ़ NEET की तैयारी पर ख़र्च करते हैं, वो भारत सरकार के पूरे शिक्षा बजट के बराबर है।
आज कोटा से, और देश के हर कोने से, लाखों युवा एक सुर में कह रहे हैं - इस व्यवस्था ने हमारे




