स्विस बैंकों के खाते अब 'गोपनीय नहीं'

स्विस बैंक
इमेज कैप्शन, स्विस बैंकों में दुनिया भर के लोग पैसा जमा करते हैं
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दुनिया भर के लोगों के गोपनीय खातों के लिए मशहूर स्विट्ज़रलैंड ने बैंक खातों की गोपनीयता में आंशिक रुप से ढील देने का निर्णय लिया है.

हालांकि अब स्विट्ज़रलैंड बैंक खातों के विवरण एक दूसरे को देने के नियम से बंधा हुआ है लेकिन उसने कहा है कि गोपनीयता में ढील देने के मामले में वह सिर्फ़ 'ठोस और न्यायोचित' अनुरोधों पर ही कार्रवाई करेगा.

सरकार ने कहा है कि वह अपने बैंकों के ग्राहकों के खातों पर विदेशों से 'अनुचित ढंग से नज़र रखे जाने' की अनुमति नहीं देगी.

स्विट्ज़रलैंड सरकार ने गोपनीयता में ढील देने का फ़ैसला तब किया है जब उस पर यह ख़तरा मंडराने लगा था कि उसे टैक्स चोरी करने वालों के स्वर्ग के रुप में ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा.

एक अनुमान है कि स्विस बैंकों में दुनिया भर के लोगों का कोई दो करोड़ खरब डॉलर (यानी कोई सौ करोड़ खरब रुपए) जमा हैं.

माना जाता है कि जो भी राशि स्विस बैंकों में जमा है वह कालाधन है.

इसमें बड़ी राशि तीसरी दुनिया के देशों के लोगों की भी है.

सहमति

आर्थिक सहयोग और विकास के लिए काम करने वाले संगठन ओईसीडी की बैठक में यह सहमति बनी.

यह संगठन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बैंकों के आँकड़े साझा करने और दुनिया भर में टैक्स की चोरी को पकड़ने की कोशिश करती है.

यह पहली बार है जब स्विट्ज़रलैंड सरकार ने ओईसीडी के नियमों को मानने की मंज़ूरी दी है.

इससे पहले वह कहती रही ऐसा करने से बैंकों के ग्राहकों की गोपनीयता बनाए रखने के उसके सिद्धांतों से समझौता करना पड़ेगा.

लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्विट्ज़रलैंड सरकार पर बड़ा दबाव था कि वह बैंक सेक्टर में सुधारों को लागू करे.

इसके चलते स्विट्ज़रलैंड को टैक्स चोरी करने वालों का स्वर्ग घोषित किए जाने का ख़तरा मंडरा रहा था. ओईसीडी ने एंडोरा, लिचटेंस्टीन और मोनैको को इन्ही कारणों से ब्लैकलिस्ट कर रखा है.

सीमित सूचनाएँ

गोपनीय खातों की सूचनाएँ देने में दो मसले हैं.

एक तो कर अपवंचन या टैक्स की चोरी का है और दूसरा टैक्स घपले का है.

टैक्स चोरी में वो मामले आते हैं जिसमें किसी व्यक्ति या संस्था ने अपनी संपत्ति की जानकारी ज़ाहिर न की हो या जानबूझकर छिपाई हो जबकि टैक्स के घपले में वो मामले आते हैं जिसमें किसी करदाता ने अधिकृत रुप से ग़लत जानकारी दी हो.

ज़्यादातर देशों में दोनों ही मामले अपराध माने जाते हैं लेकिन स्विट्ज़रलैंड में टैक्स चोरी सिर्फ़ दीवानी मामला माना जाता है और टैक्स घपले को ही आपराधिक माना जाता है.

ओईसीडी के नियमों को मानने की हामी भरते हुए स्विट्ज़रलैंड ने कहा है कि वह दूसरे देशों से टैक्स चोरी के संदेह के मामलों के पुख़्ता अनुरोधों पर ही कार्रवाई करेगा न कि सिर्फ़ टैक्स घपले के मामलों में.

इन नियमों को मानने के लिए स्विट्ज़रलैंड पर अमरीका, जर्मनी और फ़्रांस का बड़ा दबाव था.

बीबीसी की जिनेवा संवाददाता इमोगेन फ़ॉक्स का कहना है कि स्विट्ज़रलैंड सरकार के इस फ़ैसले से उसे कई अंतरराष्ट्रीय ग्राहक गँवाने पड़ सकते हैं लेकिन इस निर्णय ने उसे ब्लैकलिस्ट होने से बचा लिया है.