तेल क़ीमतें घटीं, अमरीकी बजट घाटा बढ़ा

अमरीकी डॉलर
इमेज कैप्शन, अमरीकी अर्थव्यवस्था में उतनी तेज़ी से सुधार नहीं हो रहा है जितनी उम्मीद की जा रही थी.
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वैश्विक मंदी में सुधार न हो पाने की आशंकाओं के बीच तेल की क़ीमतों में लगातार कमी हो रही है और अब यह स्तर साठ डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है.

उधर अमरीका का बजट घाटा बढ़कर एक ख़रब डॉलर तक पहुंच गया है यानी पहली बार सरकार को एक ही साल में एक ख़रब डॉलर से अधिक राशि उधार लेनी पड़ेगी ताकि बजट घाटा पूरा किया जा सके.

इस समय हज़ारों की संख्या में अमरीकी नागरिक बेरोज़गार हैं और सरकार के आयकर वसूली में बड़ी कमी देखी जा रही है. बेरोज़गारी के बढ़ने के साथ ही सरकार को अधिक मात्रा में बेरोज़गारी भत्ता देना पड़ रहा है. सरकार ने अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने के लिए जो क़दम उठाए थे उसमें भी सरकारी पैसे का बड़ा हिस्सा खर्च हो रहा है.

वर्ष 2007-08 में बजट घाटा 455 अरब डॉलर का था जो अब बढ़ गया है. बजट घाटा बढ़ने का असर सरकार के शिक्षा और स्वास्थ्य कार्यक्रमों पर पड़ सकता है.

अमरीकी कांग्रेस ने इस स्थिति को देखते हुए विभिन्न संस्थानों के लिए 700 अरब डॉलर और 787 अरब डॉलर के आर्थिक पैकेज की बात कही है ताकि अर्थव्यवस्था फिर पटरी पर आ सके और लोगों को नौकरियां मिल सकें.

हालांकि वैश्विक मंदी से पहले ही अमरीकी बजट घाटे में चला गया था जिसका प्रमुख कारण इराक़ युद्ध और टैक्स में कटौती रहा है.

अमरीकी अर्थव्यवस्था की ऐसी स्थिति के कारण दुनिया भर में चिंताएं बढ़ रही हैं

विशेषज्ञों का कहना है कि तेल की क़ीमतों में गिरावट दर्शा रही है कि वैश्विक मंदी फ़िलहाल ख़त्म नहीं हो रही है और न ही इसमें सुधार के कोई ख़ास संकेत दिखाई पड़ रहे हैं.