रीता जोशी-मायावती विवाद पर लोगों की राय

उत्तर प्रदेश में मायावती और रीता बहुगुणा जोशी के बीच पैदा हुए विवाद पर राजनीतिक गलियारों की हवा गर्म है. पर राज्य के लोगों की इस मुद्दे पर मिली जुली प्रतिक्रिया देखने को मिलती है.
अधिकतर लोग दोनों ही पक्षों की कुछ न कुछ ग़लती मानते हैं. इस पूरे विवाद पर उत्तर प्रदेश के कुछ लोगों की राय जानिए.
आशीष राय,ज्वैलरी की दुकान के मालिक

रीता जी ने ग़लत कहा था और वो निंदनीय है.
पर यह भी याद रखें कि मायावती ने जो 2007 में कहा था वो भी ग़लत था. मायावती जी ने जो बात कही थी, क्या वो शोभनीय बात थी...
दरअसल, ऐसे लोगों को राजनीति से निकाल देना चाहिए. पहले के राजनीतिक व्यक्तित्वों और आज के नेताओं में कोई तुलना नहीं हो सकती है.
एकता त्रिपाठी, सेल्सगर्ल

मायावती ने कुछ भी ग़लत नहीं किया है.
एक महिला होकर रीता जी को ऐसे शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए था.
रीता बहुगुणा की ऐसी टिप्पणी भी उस महिला के लिए हैं जो राज्य की मुख्यमंत्री है.
मुझे तो ग़लती कांग्रेस की लग रही है. कम से कम पार्टी की नीतियों को तो ध्यान में रखना चाहिए था.
पुष्पा रावत

मैं एक दलित महिला हूं.
रीता जी ने तो सही ही कहा था पर मायावती को ग़लत लगा. उनको जेल नहीं भेजना चाहिए था. उनकी कोठी नहीं फूंकनी चाहिए थी.
यहाँ यही सब हो रहा है और ग़रीब लोगों की कोई नहीं सुन रहा है.
ग़रीबों को 90 रूपए किलो के भाव से दाल मिल रही है. पर नेताओं को वो नहीं दिख रहा है.
और फिर बहन जी ने भी तो पहले ऐसा ही कुछ कहा था.
रामसागर सिंह, पत्रकार

यह पूरा ही प्रकरण दुर्भाग्यपूर्ण है.
रीता बहुगुणा बनाम मायावती कांड दरअसल, उत्तर प्रदेश की लगातार गंदी होती जा रही राजनीति और पुलिस प्रशासन की सत्ता के प्रति घृणित चाटुकारिता का जीवंत नमूना है.
जाहिर तौर पर अब समय आ गया है कि प्रदेश की जनता ऐसी राजनीति से निजात पाए.
लोग अब ऐसी राजनीति और इस तरह के नेताओं से तंग आ चुके हैं.
मेहराजुद्दीन, इलेक्ट्रीशियन

भड़काऊ भाषण देना गलत है.
इसके कारण स्थिति बिगड़ी है. रीता बहुगुणा का भाषण दलित वर्ग पर सीधा सीधा प्रहार है.
हालांकि मैं यह भी मानता हूं कि किसी के मकान पर पथराव करना आगजनी को भी उचित नहीं ठहराया जा सकता है.
वरूण गांधी ने भी भड़काऊ भाषण दिए थे. रीता भी उसी तरह भाषण दे रही हैं, वह भी उसी श्रेणी में आती हैं.
दलित मजदूर वर्ग पर प्रहार करना ग़लत है.
भगवती देवी

यह बात दलित महिला की नहीं है, सर्वसमाज की महिलाओं की है.
पैसे से महिला की इज्ज़त को न तोला जाए बल्कि दोषियों के विरूद्ध कड़े से कड़े कदम उठाए जाएं.
पीड़ित महिला किसी भी समाज की हो सकती है. उसे पैसा नहीं न्याय की जरूरत होती है.
अगर बलात्कार से पीड़ित, महिलाओं को पैसा दिया गया तो समाज में यह प्रचलन बन जाएगा.
न्याय केवल दलित को ही नहीं सर्व समाज को चाहिए.


























