बीएमडब्ल्यू हादसा: नंदा की सज़ा घटी

दिल्ली हाई कोर्ट ने चर्चित बीएमडब्ल्यू कार हादसे के अभियुक्त संजीव नंदा की सज़ा पाँच साल से घटा कर दो साल कर दी है.
हाई कोर्ट ने सोमवार को दिए फ़ैसले में कहा, “यह ग़ैर इरादतन हत्या का मामला नहीं है. यह पूरी तरह से लापरवाही का मामला है.”
संजीव नंदा के अलावा अन्य अभियुक्त राजीव गुप्ता की सज़ा एक साल से घटा कर छह महीने कर दी गई है.
हाई कोर्ट ने इस मामले में मुख्य गवाह सुनील कुलकर्णी के ख़िलाफ़ मामला दर्ज करने का आदेश दिया.
उन्हीं की गवाही के आधार पर दिल्ली की निचली अदालत ने पूर्व नौसेना प्रमुख एसएम नंदा के पोते संजीव नंदा को पांच साल की क़ैद की सज़ा सुनाई थी.
नौ जनवरी 1999 की रात दक्षिणी दिल्ली के लोधी कालोनी इलाक़े में संजीव नंदा की गाड़ी से कुचलकर छह लोगों की मौत हो गई थी.
कब क्या हुआ
10 जनवरी 1999 को दिल्ली के लोधी कॉलोनी इलाक़े में एक बीएमडब्ल्यू ने तीन पुलिसकर्मियों सहित छह लोगों को कुचल डाला. संजीव नंदा इस कार को चला रहे थे.
पुलिस ने इस मामले में अभियुक्त संजीव नंदा, माणिक कपूर और सिद्धार्थ गुप्ता को हिरासत में लिया बाद में दिल्ली उच्च न्यायालय ने उन्हें ज़मानत दे दी थी.
11 जनवरी 1999 पुलिस ने पूछताछ के लिए हिरासत में लेने की अनुमति माँगी.
7 अप्रैल 1999: पुलिस ने भारतीय दंड संहिता के विभिन्न धारा 304, धारा 308, धारा 201 और धारा 34 के तहत अभियुक्त के विरुद्ध आरोप पत्र दायर किया.
3 अगस्त 1999: कोर्ट ने अभियुक्त के विरुद्ध आरोप तय किए.
18 अगस्त 1999: कोर्ट ने गवाहों के बयानों को दर्ज करना शुरु किया.
30 सितंबर 1999: मुक़दमे में अभियोजन पक्ष ने इस मामले में एक चश्मदीद गवाह सुनील कुलकर्णी की गवाही को यह कहते हुए ख़ारिज किया कि उन्हें ख़रीद लिया गया है.
दिसंबर 2003: अभियोजन पक्ष के सभी गवाहों की गवाही पूरी हो गई. 61 गवाहों ने अपनी गवाही दी.
2 जनवरी 2004: नंदा के बयानों की रिकॉर्डिंग शुरु की गई.
8 अगस्त, 2008: दिल्ली हाईकोर्ट ने नंदा के वकील आरके आनंद और सरकारी वकील आईयू ख़ान को गवाहों को बरगलाने के आरोप में दोषी ठहराया और चार महीनों तक वकालत करने पर रोक लगा दी
2 सितंबर, 2008: पटियाला हाउस अदालत ने संजीव नंदा को ग़ैरइरादन हत्या के लिए और उनके तीन साथियों को सबूत से छेड़छाड़ के लिए दोषी ठहराया
5 सितंबर, 2008- संजीव नंदा को पाँच साल की सज़ा.


























