पुणे में दहशत, और मामले सामने आए

- Author, ज़ुबैर अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, मुंबई
- प्रकाशित
महाराष्ट्र के पुणे शहर में एक 14 साल की लड़की की स्वाइन फ़्लू से मौत के बाद वहाँ लोगों में दहशत है. साथ ही पुणे में तीन और बच्चों में स्वाइन फ़्लू की पुष्टि हुई है.
बुधवार सुबह से ही सरकारी नायडू अस्पताल में सैकड़ों छात्र, उनके माता-पिता और आम लोग स्वाइन फ़्लू की जांच के जमा हो गए.
अचानक इतने लोगों के आने और अस्पताल में कर्मचारियों की कमी से स्थिति गंभीर हो गई.
स्थित को नियंत्रण करने के लिए पुलिस को बुलाना पड़ा.
इधर महाराष्ट्र सरकार ने स्वाइन फ़्लू को देखते हुए पुणे और सतारा जिलों में महामारी अधिनियम लागू कर दिया है.
राज्य सरकार ने पुणे की एक 14 वर्षीय छात्रा की मौत होने के बाद यह क़दम उठाया है.
ग़ौरतलब है कि स्वाइन फ्ल़ू से भारत में यह पहली मौत हुई है.
इस बच्ची का इलाज निजी अस्पतालों में चलता रहा था.
अस्पतालों को नोटिस
महाराष्ट्र सरकार ने पुणे के दो निजी अस्पतालों, जहाँगीर और रूबी अस्पतालों को इस लड़की की मौत के मामले में कारण बताओ नोटिस जारी किया है.
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने मीडिया से बातचीत में कहा कि अगर समय पर बीमारी की पहचान कर उसे दवा दे दी जाती तो इस लड़की का जीवन बचाया जा सकता था,
इसके पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्वाइन फ़्लू के दिशा निर्देशों में थोड़ी ढील का एलान करते हुए कहा था कि फ़्लू के सभी मरीज़ों को अब अनिवार्य रूप से अस्पताल में नहीं दाख़िल किया जाएगा.
उनका कहना है कि मौसम को देखते हुए आने वाले दिनों में फ्लू से पीड़ित लोगों की संख्या में बढ़ोतरी हो सकती है.
मंत्रालय ने इस आशंका के मद्देनज़र स्वाइन फ़्लू के मामले में जारी कड़े दिशा निर्देशों में थोड़ी ढील दी है और कहा था कि मरीज़ों के नमूने लेने के बाद अगर मामला गंभीर न हो तो उन्हें घर जाने की अनुमति होगी.


























