'भारत में अल्पसंख्यक सुरक्षित नहीं'

अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमरीकी आयोग ने भारत को उन देशों की सूची में रखा है जहां धार्मिक अल्पसंख्यक अपने आपको असुरक्षित महसूस करते हैं.
भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस क़दम को दुखद बताया है.
अमरीकी आयोग के मुताबिक भारत में धर्म के नाम पर हिंसा में तेज़ी आई है.
इसने ख़ास तौर पर पिछले साल उड़ीसा में ईसाइयों के ख़िलाफ़ हुई हिंसा और वर्ष 2002 में गुजरात में हुए दंगों का ज़िक्र किया है.
इस सूची में शामिल अन्य देशों में अफ़ग़ानिस्तान, सोमालिया और क्यूबा हैं.
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विष्णु प्रकाश ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "भारत में एक अरब से ज़्यादा लोग रहते हैं और यह धार्मिक और जातीय विभिन्नता वाला देश है."
उनका कहना था, "अगर कोई गड़बड़ी होती भी है तो हमारे क़ानूनी ढाँचे के तहत स्वतंत्र न्यायपालिका और सतर्क मीडिया के सहयोग से इससे तुरंत निपटा जाता है."
पिछले साल उड़ीसा के कंधमाल ज़िले में एक हिंदू नेता की हत्या के बाद ईसाइयों के ख़िलाफ़ कई हफ़्तों तक हिंसा हुई थी.
गुजरात में वर्ष 2002 में हुए दंगों में एक हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए थे जिनमें अधिकांश अल्पसंख्यक समुदाय के थे.
अमरीकी आयोग का कहना है कि राष्ट्रपति बराक ओबामा को अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए भारत सरकार से अपील करनी चाहिए.


























