बाड़मेर में है मायूसी

जसवंत सिंह
इमेज कैप्शन, राज्य बीजेपी पार्टी हाईकमान के साथ नज़र आ रही है.
    • Author, नारायण बारेठ
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, जयपुर
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सेना से सियासत में आए जसवंत सिंह के लिए उनके अपने राज्य राजस्थान में ये एक मुश्किल घड़ी है.

वैसे उन्हें कोई बड़े जनाधार वाला नेता नहीं माना जाता है और ऐसे में पार्टी से निष्कासन पर उनके नाम पर बहुत हिमायत का शोर सुनाई न देना स्वाभाविक ही है.

लेकिन उनके अपने गृह ज़िले बाड़मेर में जसवंत सिंह के समर्थक बहुत मायूस हुए है.

वहीं राज्य बीजेपी ने पार्टी के फैसले का स्वागत किया है और कहा है की संगठन से बड़ा कोई नहीं हो सकता .

जसवंत सिंह जोधपुर से एक बार सांसद भी रहे है. लेकिन वहां बीजेपी कार्यकर्ताओ में उनकी हिमायत करने वाला कोई नजर नहीं आया.

जोधपुर में बीजेपी नेता और पूर्व मंत्री राजेंद्र गहलोत कहते है- ``पार्टी ने ये फैसला बहुँत देर से किया, मेरा मानना है पार्टी को अब अपने इस फ़ैसले पर पुनर्विचार नहीं करना चाहिए.’’

गहलोत तो अपनी पार्टी के कल तक शीर्ष नेता रहे जसवंत सिंह के इतिहास के ज्ञान पर भी सवाल उठाते है

उनका कहना है,``उन्हें स्वाधीनता आन्दोलन का पूरा ज्ञान भी नहीं है, उनके किताब में लिखे विचारो से पार्टी को बड़ा नुकसान हुआ है.’’

जोधपुर में ही एक और बीजेपी कार्यकर्ता नरेन्द्र कछवा कहते है जसवंत सिंह की कार्यशैली भी ठीक नहीं थी.

उनका कहना है,``पार्टी कब तक बर्दाश्त करती. उनको रुखसत करने से पार्टी को फायदा ही होगा.’’

जसवंत सिंह के अपने ज़िले बाड़मेर में नगरपालिका के अध्यक्ष बलराम प्रजापत कहते है ,``पार्टी का फैसला ठीक ही है. हम भी पार्टी के फैसले के साथ है.’’

लेकिन साथ ही कहते हैं कि जसवंत सिंह विद्वान् है, लेखक हैं और लेखक की लेखनी को बांध कर नहीं रखा जा सकता.

``हाँ उनके हटने से हमारे इलाके को जरूर नुकसान है.’’

जसवंत सिंह का पैत्रिक गांव जसोल बालोतरा नगरपालिका के अधीन आता है.

बालोतरा की नगरपालिका अध्यक्ष प्रभा सिंघवी कहती है ,``जसवंत सिंह तो इस इलाके के आदर्श है. उनके दिल्ली में मजबूत होने से रेगिस्तान के लोगो का हौसला बना रहता था कि कभी कोई मुश्किल आई तो जसंवत सिंह जी हैं.’’

जसवंत सिंह ने भैरों सिंह शेखावत की सरपरस्ती में सियासत की ऊँची सीढिया चढी.

मगर हाल के वर्षो में राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से उनकी बिलकुल नहीं बनी.

उन्हें राजस्थान में राज्य और केंद्रीय बीजेपी के बीच एक मजबूत कड़ी समझा जाता था. लेकिन अब जसवंत सिंह राजस्थान की राजनीतिक भीड़ में अकेला पड़ा चेहरा नज़र आ रहे है.