बाग़ी तेवरों के बीच भाजपा की बैठक

आंतरिक संकट से जूझ रही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की मंगलवार को बैठक हुई है.
भाजपा अपने वरिष्ठ नेता अरुण शौरी के प्रहारों से आहत है और नेता ये तय करने में जुटे हैं कि उनकी आलोचनाओं और माँगों का जवाब कैसे दिया जाए.
इस बैठक में पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह, उपाध्यक्ष मुख़्तार अब्बास नक़वी, महासचिव विजय गोयल और विनय कटियार भी उपस्थित थे.
मुख़्तार अब्बास नक़वी ने कहा कि पार्टी में किसी तरह का विद्रोह नहीं है. उन्होंने विश्वास जताया कि भाजपा मज़बूत होकर आगे बढ़ेगी.
पूर्व विनिवेश मंत्री और वरिष्ठ नेता अरुण शौरी ने भाजपा के शीर्ष नेताओं को अक्षम बताते हुए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) से पार्टी का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की माँग की थी.
उन्होंने जसवंत सिंह के निष्कासन और पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह की क्षमता पर भी सवाल उठाए हैं.
पिछले कुछ दिनों से पार्टी में आंतरिक अंतर्विरोध बढ़ चुका है. जसवंत सिंह के निष्कासन के बाद लाल कृष्ण आडवाणी के सहयोगी रहे सुधींद्र कुलकर्णी भी पार्टी से अलग हो गए.
राजस्थान में पार्टी की वरिष्ठ नेता वसुंधरा राजे भी विधायक दल के नेता पद से हटने की केंद्रीय नेताओं के निर्देश का विरोध कर चुकी हैं.
आरएसएस का इनकार

अरुण शौरी की माँग पर आरएसएस ने स्पष्ट किया है कि यह उसका काम नहीं है कि वह भारतीय जनता पार्टी के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप करे.
दिल्ली में मीडिया से बातचीत में आरएसएस की राष्ट्रीय समिति के सदस्य राम माधव ने कहा कि संघ एक सांस्कृतिक संगठन है और उसकी राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं है.
राम माधव ने कहा कि संघ की भूमिका भाजपा को सलाह देने तक ही सीमित है.
अरुण शौरी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से अपील की थी कि वह पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को हटाकर कमान अपने हाथों में ले ले.
उन्होंने कहा, "मेरे विचार में भारतीय जनता पार्टी एक कटी पतंग की तरह है. इसे तुरंत संभालने की ज़रूरत है. मैं नहीं समझता कि पार्टी के अंदर ऐसा कोई है, जो ये काम कर सकता है. सिर्फ़ आरएसएस ये काम कर सकती है."
चुनाव नतीजों के बाद यशवंत सिन्हा, जसवंत सिंह और अरुण शौरी ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साधा था और हार की ज़िम्मेदारी लेने की बात कही थी.


























