उड़ीसा में डायरिया से 26 की मौत

उड़ीसा के स्वास्थ्य मंत्री का कहना है कि प्रदेश में डायरिया से 26 लोगों की मौतें हुई हैं.
उनके अनुसार ये मौतें कालाहांडी ज़िले के अनेक गाँवों में पिछले दो हफ़्तों में हुई हैं.
हालाँकि स्थानीय समाचार पत्रों ने मरने वालों की संख्या 38 बताई है.
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि राज्य में 237 लोग डायरिया की चपेट में हैं.
अधिकारियों के अनुसार संघीय राष्ट्रीय संक्रमण रोग संस्थान (एनआईसीडी) की टीम प्रभावित ज़िले में भेज दी गई है जो उस इलाक़े में डायरिया के प्रकोप के कारणों का अध्ययन करने में जुट गई है.
ग़रीब इलाक़ा
राज्य अधिकारियों का कहना है कि दूषित पानी और ख़राब हो चुका खाना डायरिया का कारण हो सकता है.
उनका कहना है कि डॉक्टर और पैरामेडिकल की टीम दूर-दराज़ के गाँवों में जाने की कोशिश कर रही हैं.
अधिकारियों का कहना है कि प्रभावित इलाक़ों में पहुँचने के लिए डॉक्टरों की टीम को पाँच से सात किलोमीटर पैदल चलना पड़ सकता है.
स्वास्थ्य मंत्री का कहना है कि डायरिया पर क़ाबू पाने के लिए सौ डॉक्टरों की टीम मोबाइल मेडिकल वैन में घूम रही हैं, ताकि बीमारी पर क़ाबू पाया जा सके.
कालाहांडी में डॉक्टरों की कमी है क्योंकि स्थानीय अस्पतालों में सरकार की ओर से 173 डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं जबकि वहाँ सिर्फ़ 103 डॉक्टर ही कार्यरत हैं.
कालाहांडी भारत के सबसे ग़रीब हि्स्सों में एक है और वहाँ से भूख से मौतों की ख़बरें आती रही हैं. इससे पहले भी इन ज़िलों में डायरिया और हैजे से मौतें हो चुकी हैं.
इन इलाक़ों में पीने का पानी तालाबों से लिया जाता है जो अक्सर दूषित होते हैं. दो साल पहले कालाहांडी, बलांगीर और कोरापुट ज़िले में हैजे से सौ से अधिक लोगों की मौत हो गई थी.


























