अनिवार्य शिक्षा विधेयक पर विवेचना
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शिक्षा का अधिकार हर बच्चे को मिले ये सरकार अपनी मंशा बताती है और पर आज भी यथार्थ इस से परे है. गरीब पिछडो़ और समाज के ऐसे कई तबको के लिए आज भी स्कूल और कॉलेज पहुँच से बाहर है. पर इस सब के बीच आशा की किरण भी दिख जाती है. दिल्ली में इस साल झुग्गी झोपडियों में रहने वाले एक सौ पैंतीस बच्चे कॉलेज में दाखिला पाने का सपने पूरा कर पाए हैं.
भारतीय संसद ने छह से चौदह साल के बच्चों की शिक्षा को मुफ्त और अनिवार्य करने का विधेयक पारित कर दिया है और राष्ट्रपति की सहमति के बाद ये अधिकार बन जाएगा. नौ साल से इस पर चर्चा और विचार के बाद ये यथार्थ बना है पर क्या इसे ऐतिहासिक माना जाए या फिर ये कई समस्याओं से घिरा है?
प्रस्तुत है इस विषय पर रेणु अगाल की विवेचना...