ग़ज़ा की कार्रवाई में चरमपंथी की मौत

ग़ज़ा पट्टी में हमास के साथ गोलीबारी में शामिल एक चरमपंथी गुट के नेता अब्दुल लतीफ़ मूसा की एक विस्फोट में मौत हो गई है. इस संघर्ष में कुल मिलाकर 22 लोग मारे गए.
अधिकारियों के अनुसार मूसा को जब ये लगा कि हमास के अधिकारी उन्हें हिरासत में ले लेंगे तो उन्होंने आत्मघाती बेल्ट का इस्तेमाल करते हुए ख़ुद को बम से उड़ा दिया.
इससे पहले हमास ने शुक्रवार को उस इस्लामी गुट जुंद अंसार अल्लाह के विरुद्ध सैनिक अभियान शुरू किया जिसमें लोगों की जान गईं.
मिस्र की सीमा से लगे रफ़ा में एक मस्जिद पर हुए हमले में बड़ी संख्या में लोग घायल भी हुए हैं. इसके अलावा हमास ने अब्दुल लतीफ़ मूसा के घर पर भी छापा मारा.
संघर्ष लगभग सात घंटों तक चला और शुक्रवार आधी रात जाकर समाप्त हुआ.
संघर्ष में हमास के छह लड़ाके मारे गए जिनमें एक वरिष्ठ कमांडर भी शामिल है. इसके अलावा एक आम नागरिक मारा गया और शेष लोग जुंद अंसार अल्लाह गुट के थे.
बीबीसी के रश्दी अबू अलूफ़ ने बताया है कि 120 लोग घायल हैं जिनमें कुछ की हालत गंभीर भी है.
'मूसा ज़िम्मेदार'
हमास के प्रवक्ता ताहेर अल-नोनो के मुताबिक़, "जो भी हुआ उसके लिए हम अब्दुल लतीफ़ मूसा को ज़िम्मेदार ठहराते हैं क्योंकि उन्होंने ही जुमे की नमाज़ के दौरान ग़ज़ा को इस्लामी अमीरात घोषित कर दिया."
माना जाता है कि ये गुट अल-क़ायदा से जुड़ा हुआ है.
नोनो का कहना है कि उस गुट से जो भी जुड़ा हुआ है उसे हथियार सहित फ़लस्तीनी पुलिस के सामने समर्पण कर देना चाहिए.
अब्दुल लतीफ़ मूसा और उनके सशस्त्र समर्थकों ने अंतिम साँस तक लड़ने का संकल्प लिया था और कहा था कि मस्जिद पर हमास का क़ब्ज़ा नहीं होने देंगे.
ग़ज़ा में हमास के नेता इस्माइल हानिया ने जुमे के अपने ख़ुतबे में मूसा की बातों को पूरी तरह ख़ारिज कर दिया था.
उनका कहना था कि इस तरह इस्लामी अमीरात की कोई भी घोषणा ग़ज़ा पट्टी के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय साज़िश है.
जुंद अंसार अल्लाह गुट हमास का कड़ा आलोचक रहा है.


























