किम दए जुंग नहीं रहे

किम दए जुंग
इमेज कैप्शन, कभी उन्हें ख़तरनाक चरमपंथी कहा जाता था.
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दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति किम दए जुंग का मंगलवार को देहांत हो गया.

किम का निमोनिया के लिए इलाज चल रहा था लेकिन खबरें हैं की उनकी मौत दिल की गति रुकने से हुई.

उन्हें उत्तर कोरिया के साथ, सनशाइन पॉलिसी ऑफ़ एंगेजमेंट यानि बातचीत की प्रक्रिया शुरू करने के लिए वर्ष 2000 मे नोबेल शांति पुरूस्कार भी मिला था.

ये स्पष्ट नही है कि उनका जन्म कब हुआ था.

उनके राष्ट्रपति काल से जुड़ी वेबसाइट के अनुसार उनका जन्म 6 जनवरी 1924 को हुआ था लेकिन ख़बरे हैं की उन्होने जापानी शासन के दौरान सेना मे भरती होने से बचने के लिये अपनी जन्म तिथि को बदलकर 3 दिसंबर 1925 कर दिया था.

दक्षिण कोरिया में दशकों चले सैनिक शासन के दौरान किम दए जुंग को ख़तरनाक कट्टरपंथी कहा जाता था.

कई बार उनकी हत्या करने के प्रयास किए गए, उन्हें जेल में प्रताडित किया गया और उन्हें मौत की सज़ा भी सुनाई गयी थी.

उन्हें दो बार निर्वासित किया गया और कई बार किम घर मे नज़रबंद भी रहे. बाद में उन्हे सारे आरोपों से बरी कर दिया गया और तीन प्रयासों के बाद, चौथी बार मे वो 1997 में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति बने.

ये एक ऐतिहासिक चुनाव था क्योंकि 1948 मे दक्षिण कोरिया के गठन के बाद ये पहला मौका था जब शांतिपूर्वक तरीके से सत्ता, सत्ताधारी पार्टी से विपक्ष के हाथ में गई. किम 2003 तक राष्ट्रपति रहे.

एएफपी समाचार एजेंसी को दिए एक साक्षात्कार के अनुसार किम ने कहा था कि उन्हें अपने कठिनाईयों से भरे जीवन से कोई गिला शिकवा नहीं रहा है और जान पर ख़तरे के बावजूद वो अपने सिद्धांतों से नही हटे और अन्याय से कभी समझौता नही किया.

किम के अनुसार उनके शासनकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि उत्तर कोरिया के साथ वार्ता रही जिसके लिये उन्हे नोबेल पुरस्कार भी मिला था.