स्वस्थ लोगों को फ़्लू की दवा नहीं

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि अगर आम तौर पर स्वस्थ रहने वाले मरीज़ों को स्वाइन फ़्लू होता है तो उन्हें टैमीफ़्लू दवा देने की ज़रूरत नहीं है.
संगठन के मुताबिक एंटीवायरल दवाएँ उन्हीं मरीज़ों को दी जानी चाहिए जो गंभीर रूप से बीमार हैं, जिनकी हालत लगातार बिगड़ रही है या फिर जो हाई-रिस्क ग्रुप में आते हैं जैसे- छोटे बच्चे, 65 साल से बड़े लोग, गर्भवती महिलाएँ या दमे जैसी बीमारियों से पीड़ित लोग.
इस महीने हुए एक शोध में कहा गया था कि इस दवा का इस्तेमाल बच्चों के लिए नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि इससे साइड-इफ़ेक्ट होता है जबकि बीमारी की पेचीदगियाँ दूरी नहीं होतीं.
शोध की ज़रूरत
डब्ल्यूएचओ का कहना है कि वायरस से संक्रमित ज़्यादातर मरीज़ों में इन्फ़्लूएंज़ा के लक्षण देखे जा सकते हैं और चिकित्सा के बग़ैर भी एक हफ़्ते के अंदर लोग ठीक हो जाते हैं. इसलिए गंभीर रूप से बीमार नहीं पड़ने वाले लोगों को एंटीवायरल देने की आवश्यकता नहीं है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बात पर और शोध की ज़रूरत है कि टैमीफ़्लू किस हद तक सुरक्षित है.
कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के डॉक्टर क्राइस्ट स्मिथ कहते हैं, “जब ये वायरस सामने आया था तो हमें पता नहीं था कि ये कितना ख़तरनाक है और इसका इलाज कैसे किया जाए. अब हमें पता है कि ये आम तौर पर होने वाले फ़्लू से ज़्यादा गंभीर नहीं है और इसके लिए स्वस्थ लोगों को टैमीफ़्लू नहीं देते. आख़िर इसके साइड-इफ़ेक्ट तो होंगे ही और ये महंगी भी है.”
भारत में स्वाइन फ़्लू से 45 मौतें हो चुकी हैं जबकि ब्रिटेन में 61 लोगों की जान गई है.
ब्रिटेन के स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि वो मरीज़ों की सेहत को ज़्यादा तरजीह दे रहा है और वो सबको एंटी-वायरल दवा दे रहा है.


























