'श्रीलंकाई तमिलों का शीघ्र पुनर्वास हो'

श्रीलंका के नए सेनाध्यक्ष का कहना है कि तमिल विद्रोहियों के साथ हुए संघर्ष के कारण विस्थापित हुए ढाई लाख लोगों के पुनर्वास का काम जल्दी से जल्दी होना चाहिए.
पिछले महीने सेनाध्यक्ष नियुक्त हुए लेफ़्टिनेन्ट जनरल जगत जयसूर्या ने स्वीकार किया है कि इस राह में अभी बाधाएं हैं.
नए सेनाध्यक्ष ने कहा कि देश युद्ध के बाद के चरण में प्रवेश कर रहा है और अगर सेना का थोड़ा भी विस्तार होता है तो उसे फिर से प्रशिक्षण देना होगा.
लेफ़्टिनेन्ट जनरल जयसूर्या ने पत्रकारों से कहा,"यह मेल मिलाप, पुनर्वास और पुनर्निर्माण का नया दौर है और सेना को शांति के समय के लिए प्रशिक्षित करना होगा".
जनरल जयसूर्या की टिप्पणी श्रीलंका की सशस्त्र सेना के प्रमुख जनरल सरथ फ़ॉन्सेका की उस बयान पर ज़्यादा ज़ोर नहीं देता जिसमें जनरल फ़ॉन्सेका ने कहा था कि सेना में एक लाख नए सैनिकों की भर्ती हो सकती है.
लेफ़्टिनेन्ट जनरल जयसूर्या ने कहा,"जो हमारे नियंत्रण में आया है उसे और पुख़्ता करना है और यह सुनिश्चित करना कि ऐसी स्थिति फिर न पैदा हो. यही हमारा मुख्य काम होगा".
जनरल जयसूर्या ने ये भी कहा कि तमिल शरणार्थी जो इस समय सरकारी शिविरों में रह रहे हैं उनका जल्द पुनर्वास होना चाहिए.
लेकिन उन्होने कहा कि अब भी सरकारी शिविरों में तमिल टाइगर मौजूद हैं जो उन 10 हज़ार लोगों से अलग हैं जिन्होंने सदस्य होना स्वीकार किया है. इसलिए सभी शरणार्थियों की जांच जारी रखना ज़रूरी है.
जब जनरल जयसूर्या से ये पूछा गया कि क्या अब भी देश के अन्य हिस्सों में तमिल टाइगर मौजूद हैं तो उन्होने कहा कि लड़ाई ख़त्म होने से पहले कुछ सदस्यों को आत्मघाती हमलों के लिए दक्षिण की ओर भेजा गया था लेकिन उनका नेटवर्क अब टूट गया है और उनके नेता मारे गए हैं, इसलिए उन्हें किसी से नए निर्देश नहीं मिल रहे.


























